भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान को पानी की जानकारी देना बंद कर दिया, जिसका ईरादा स्पष्ट था कि वह पानी और खून एकसाथ नहीं बह सकते। 22 अप्रैल के बाद भारत ने अपने हित में पाकिस्तान की ओर बहने वाली छह नदियों का उपयोग करना शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान को उसकी कृषि के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में पाकिस्तान के नेता और सैनिक भारत को डराने-धमकाने लगे हैं। पाकिस्तान के जनरल शमशाद मिर्ज़ा ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह का पानी का शिथिलन युद्ध की स्थिति है।
इसका परिदृश्य यह है कि भारत ने सिंधु नदी समझौते का पूरी तरह से अनुपालन न करते हुए पाकिस्तान को पानी की जानकारी देना बंद कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, पाकिस्तान की कृषि पर असर पड़ा है। भारत में चिनाब नदी पर निर्मित बांधों ने भी इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है। भारत की तरफ से पानी का नियंत्रण बढ़ाने के साथ-साथ, चीन भी भारत के इस कदम पर नजर बनाए हुए है और उसने भारत को चेतावनी दी है कि यदि उसने पाकिस्तान का पानी रोका तो वह भी भारत जलश्रोतों का नियंत्रण कर सकता है।
चीन द्वारा बनाई जा रहीं प्रमुख जल योजनाओं के बीच, भारत को अपनी जल-नीति को सशक्त बनाने की जरुरत है। हालाँकि, कई चुनौतियों का सामना करते हुए, भारत ने अपनी जल नीतियों पर ध्यान केंद्रित किया है।