
यदि हम भाजपा के यात्रा की बात करें, तो यह एक साल पहले की ‘स्नेह यात्रा’ से शुरू हुई थी। इस यात्रा ने भाजपा को केरल में ईसाई समुदाय के बीच एक नई पहचान दिलाई। मुन्नाम्बम में 400 एकड़ की भूमि के विवाद ने इस समुदाय को फिर से राजनीतिक दृश्य पर लाने का मौका दिया। यहां 50 ईसाई, जो पहले से ही संघर्ष कर रहे थे, भाजपा में शामिल हुए।
हाल के दिनों में कांग्रेस और वाम दलों की भूमिका ने भाजपा को इस मामले में नया साथी बना दिया है। भाजपा ने चार प्रमुख ईसाई नेताओं को अपने साथ लिया, जिससे यह पार्टी ईसाई समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रही। भाजपा ने सुरेश गोपी जैसे नेताओं को राज्य में अपना पहला सांसद बनाया, जो समुदाय के साथ जुड़ने में अहम थे।
इसके अलावा, मुन्नाम्बम के मुद्दे पर भाजपा का दृष्टिकोण इस समुदाय की चिंताओं को समझने और हल करने की कोशिश कर रहा है और सबको संबोधित कर रहा है।
येस, भाजपा ने स्नेह यात्रा से अब तक के सफर में ईसाई समुदाय के बीच एक खास स्थान बनाया है, जो आगे चलकर पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ हो सकता है।