च्यूइंग गम का सेवन करते समय, यह नए अध्ययन में पाया गया है कि हर ग्राम गम के लिए औसतन 100 से हजारों माइक्रोप्लास्टिक का उत्सर्जन होता है। और यह केवल सिंथेटिक गम में नहीं, बल्कि प्राकृतिक गम में भी पाया गया है।

गम और माइक्रोप्लास्टिक एक्सपोजर
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि च्यूइंग गम में शामिल रबर के आधार और फ्लेवरिंग के साथ-साथ कई अन्य सामग्री भी इनमें माइक्रोप्लास्टिक का अतिरिक्त स्रोत हो सकते हैं।
एसीएस की एरिज़ोना की बैठक में प्रस्तुत एक अध्ययन में अनुशंसा की गई कि गम चबाने वाले व्यक्ति के मुँह में 100 माइक्रोप्लास्टिक्स का औसत उत्सर्जन होता है। हालांकि यह अध्ययन अभी तक पत्रिकाओं में प्रकाशित नहीं हुआ है
अध्ययन का उद्देश्य और निष्कर्ष
संजय मोहन, इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता, ने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी को भी डरा देना नहीं है। वे माइक्रोप्लास्टिक के संभावित स्वास्थ्य हानियों के बारे में गंभीरता से सोचते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ज्ञात नहीं है कि क्या माइक्रोप्लास्टिक हमारे लिए हानिकारक हैं या नहीं।
इस अध्ययन में, गम के विभिन्न प्रकारों (सिंथेटिक और प्राकृतिक) पर वार्ता की गई। शोधकर्ताओं ने दस प्रकार की गम का परीक्षण किया जिसमें हर गम के लिए उनके चबाने की अवधि का ध्यान रखा गया।

स्वास्थ्य पर असर
नवीनतम शोध में इस बात का उल्लेख किया गया है कि मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोप्लास्टिक की भूमिका अभी भी खोजी जा रही है। एक हालिया समीक्षा में यह बात सामने आई है कि माइक्रोप्लास्टिक सांस, पाचन स्वास्थ्य और प्रजनन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं और शायद पेट और फेफड़े के कैंसर के साथ भी जुड़े हुए हैं।
### क्या आपको च्यूइंग गम का सेवन बंद करना चाहिए?
कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि गम टुकड़ों के सेवन को सीमित करना या पूरी तरह से रोकना फायदेमंद हो सकता है। जबकि अन्य लोग इसे पूरी तरह से छोड़ने का समर्थन करते हैं क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक का सेवन अन्य प्रकार के प्लास्टिक के सेवन में जोड़ सकता है।
निष्कर्ष: च्यूइंग गम में माइक्रोप्लास्टिक का उच्चतम अनुपात पाए जाने की संभावनाओं के कारण, कुछ व्यक्तियों के लिए च्यूइंग गम का सेवन एक व्यक्तिगत विकल्प बन गया है।
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अस्वीकृति: यह लेख स्वचालित रूप से जनरेट किया गया है और इसमें ए.आई. तकनीक का उपयोग किया गया है।
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